गजल:
उदासी को छोड़ो जरा मुस्कुरा लो,
गुमसुम क्यूं बैठे हो कोई गीत गा लो।
अंधेरे इस जीवन में घिर आते कई बार,
आस की लौ से तुम जहां जगमगा लो।
हार के यूं बैठो ना मायूस होकर,
फिर जीतने का विश्वास तुम दोहरा लो।
हकेले में घावों को कुरेदो मत यारों,
किसी प्रेमगीत का पद गुनगुना लो।
माना अपनों की पीड़ा से हो व्यथित,
औरों की खुशी में तुम खिलखिला लो।
-उमेश कुमार चौरसियासंपर्क-09829482601
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010
मेरी नयी प्रकाशित संपादित पुस्तकें
मेरी नयी प्रकाशित संपादित पुस्तकें :- (1) बच्चों के प्रेरक-बापू - महात्मा गांधी के ऐसे प्रेरक जीवन प्रसंगों का संकलन जो बच्चों को जीवन मूल्यों से परिचित कराते हुए उन्हें अपनाने की प्रेरणा देते हैं। वर्ष 2010/हिन्दी/अरावली प्रकाशन, जयपुर/रू.200 मात्र। (2) मंगल प्रभात (बापू के एकादश व्रत) - महात्मा गांधी द्वारा बताये गये जीवनोपयोगी ग्यारह व्रतों का सरल हिन्दी भाषा में सचित्र संकलन। वर्ष 2010/ हिन्दी/साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर/रू.100 मात्र।(3) मेरी युवा दृष्टि-गांधी - नई पीढ़ी को अपना तन-मन स्वस्थ व पवित्र रखते हुए जीवन में सफलता का मार्ग दिखाते गांधीजी के विचार लेखों का अनूठा संकलन। वर्ष 2010/हिन्दी/अपोेलो प्रकाशन, जयपुर/रू.100 मात्र।
शुक्रवार, 27 नवंबर 2009
``बच्चों के प्रेरक-बापू संपादक - उमेश कुमार चौरसिया अरावली प्रकाशन, चौडा रास्ता, जयपुर फोन नं.0141 2310785 ``यह कितनी गलत बात है कि हम मैले रहें और दूसरों को साफ रहने की सलाह दें।`` -गांधीजीमहात्मा गांधी ने जब भी-जो भी कहा, पहले उसे अपने जीवन में-आचरण में पूर्णत: अपनाया। प्रतिपल सत्य-अहिंसा का कठोर पालन, मैला ठोने की प्रथा समाप्त करने के लिए स्वयं मैला साफ करना, लाखों निर्धनों की पीड़ा समझकर स्वयं लंगोट धारण करना, स्वयं सूत कातकर उसके वस्त्र पहनना, उपवास और सत्याग्रह का अभूतपूर्व-प्रभावी प्रयोग, सत्कार्य में निडरता, अपना छोटे से छोटा काम भी खुद करने की आदत............... ऐसे गांधीजी के जीवन का प्रत्येक क्षण हमें आज भी प्रेरणा देता दिखाई देता है। गांधीजी का जीवन एक दशZन है, जिसे आत्मसात करके हम अपना जीवन सहज-सरल-श्रेष्ठ बना सकते हैं।रंगकर्मी एवं लेखक श्री उमेश कुमार चौरसिया ने गांधीजी के जीवन-प्रसंगों में से ऐसे कुछ प्रसंगों को इस पुस्तक में संपादित किया है जो बच्चों के लिए पथप्रदशZक सिद्ध होंगे। श्री चौरसिया वषाZें से नाट्य लेखन-निर्देशन व लघुकथा और आलेखों के माध्यम से जीवन-मूल्यों व प्रेरक ऐतिहासिक कथानकों को प्रस्तुत करते रहे हैं। ये जीवन-मूल्य ही हमारे जीवन में सफलता की कुंजी हैं। `बच्चों के प्रेरक-बापू` पुस्तक भी महात्मा गांधी के जीवन के प्रेरणास्पद प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को सेसे कई जीवन-मूल्यों से परिचित कराने का सुन्दर व सार्थक प्रयास है। संस्मरणों को उपयोगिता की दृष्टि से पांच भागों में सम्पादित करते हुए प्रसंग से मिलने वाली प्रेरणा को ही शीर्षक बनाकर श्री उमेश कुमार चौरसिया ने पुस्तक को सरल-रोचक व पठनीय बना दिया है। निश्चय ही यह संकलन बच्चों को अपना जीवन श्रेष्ठ व सफल बनाने सहयोगी सिद्ध होगा।
मंगलवार, 15 सितंबर 2009
शनिवार, 2 मई 2009
मंगलवार, 29 जुलाई 2008
में क्या हूँ
मैं एक नाटककार और नाट्य अभिनेता व निर्देशक हूँ । मुझे५ नाटक राज्यस्तर पर पुरस्कृत हुए हैं । में बच्चों के लिए विशेष रूप से नाटक लिख रहा हूँ और कई बाल नाट्य शिविरों में निर्देशन भी करता रहा हूँ।लघुकथाएं, व्यंग्य और गीत-कवितायें भी लिखता हूँ। मेरे नाटक या अन्य रचना पढ़ना चाहते हों या प्रकाशित करना कहते हों तो मेल करें।
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